जिनगी अबिरथा होगे रे संगवारी सुना घर – अंगना भात के अंधना सुखागे जबले तै छोड़े मोर घर -अंगना छेरी – पठरू ,घर कुरिया खेती – खार खोल – दुवार कछु नई सुहावे तोर बोली ,भाखा गुनासी आथे का मोर ले होगे गलती कैसे मुरछ देहे मया ल सात भाँवर मड़वा किंजरेंन मया के गठरी म बंध गेन नान – नान, नोनी – बाबू मया चोहना ल कैसे भुलागे जिनगी जरत हे तोर मया के खातिर ….. काबर तै मोला भुलागे जिनगी ल अबिरथा बनादे लहुट आ अब मोर जिनगी…
Read MoreYear: 2019
का जनी कब तक रही पानी सगा
का जनी कब तक रही पानी सगा कब तलक हे साँस जिनगानी सगा आज हाहाकार हे जल बूँद बर ये हरय कल के भविसवाणी सगा बन सकय दू चार रुखराई लगा रोज मिलही छाँव सुखदाई हवा आज का पर्यावरण के माँग हे हव खुदे ज्ञानी गुणी ध्यानी सगा सोखता गड्ढा बना जल सोत कर मेड़ धर परती धरा ला बोंत कर तोर सुख सपना सबे हरिया जही हो जही बंजर धरा धानी सगा तोर से कुछ होय कर कोशिश तहूँ कुछ नही ता नेक कर ले विश तहूँ प्रार्थना सुनही…
Read Moreबिरहा के आगी
जान – चिन्हार 1ः- रत्नाकर – एकठन कबि 2ः- किसन – परम आत्मा 3ः- उधव – किसन के सखा 4ः- राधा – किसन के सखी 5ः- ललिता – राधा की सखी 6:- अनुराधा – राधा की सखी दिरिस्य: 1 रत्नाकर – गोपीमन अउ किसन के बिरह के पीरा के कथा अकथनीय हावय। अथहा हावय, जेला नापा नी जा सकाय। ओ बियथा के बरनन ला चतुर अउ बने कबि ला कहत नी बनय। मैंहर तो आम आदमी हावंव। जइसने बरज के गोपी मनला संदेस दे बर उधव ला समझाय लागिस, वइसने…
Read Moreगरमी के दिन आगे
गरमी के दिन आगे संगी , मचगे हाहाकार । तरिया नदियाँ सबो सुखागे , टुटगे पानी धार ।। चिरई चिरगुन भटकत अब्बड़ , खोजत हावय छाँव । डारा पाना जम्मो झरगे , काँहा पावँव ठाँव ।। तीपत अब्बड़ धरती दाई , जरथे चटचट पाँव । बिन पनही के कइसे रेंगव , जावँव कइसे गाँव ।। बूँद बूँद पानी बर तरसे , कइसे बुझही प्यास । जगा जगा मा बोर खना के , करदिस सत्यानास ।। बोर कुवाँ जम्मो सुख गेहे , धर के बइठे माथ । तँही बचाबे प्राण सबो…
Read Moreमोर छइयां भुइयां के माटी
मोर छइयां भुइयां के माटी रे संगी महर.महर ममहाथे न, गंगाजल कस पावन धारा महानदी ह बोहाथे न । मोर छइयां भुइयां के माटी रे संगी महर.महर ममहाथे न ।। धान कटोरा हे मोर भुइयां ये हीरा मोती उगलथे रे, अरपा, पैरी, सोंढूर, शिवनाथ एकर कोरा म पलथे रे । अछरा जेकर हरियर-हरियर मया इहां पलपलाथे न, मोर छइयां भुइयां के माटी रे संगी महर महर ममहाथे न ।। मैनपाट जस शिमला लागे कश्मीर जस चैतुरगढ़ सोहे, प्रयागराज जस राजीव लोचन भोरमदेव हर मन ल मोहे । डोंगरगढ़ म माता…
Read Moreसंगी के बिहाव
दोस्ती म हमर पराण रिहिस हे, जुन्ना अब संगवारी होगे। तोर बिहाव के बाद संगी, मोर जिनगी ह अंधियारी होगे। बाबू के घर म खेले कूदे, तै दाई के करस बड़ संसो। सुन्ना होगे भाई के अंगना, जिहाँ कटिस तोर बरसों।। अपन घर ह पराया अऊ, पर के घर अपन दुवारी होगे। तोर बिहाव के बाद संगी, मोर जिनगी ह अंधियारी होगे।। तोर आंखी म आँसू आतिस, त मोर छाती ह कलप जाये। जबै तैहा खुश होतै पगली, तभै मोला खुशी मिल पाये।। बिहाव होए ले संगी तोर, दिल के…
Read Moreलमसेना प्रथा चालू करव
आज मँय एक ठन अलकरहा गोठ करेबर जात हँव। आजकल हमर देस, प्रांत सबो डहर एकेच गोठ सुनेबर मिलथँय कि बहूमन अपन सास ससुर ला अबड़ तपथँय दुख देथँय। एहा समाजिक समस्या बनत जावत हावय। सास ससुर मन सियान होय के पाछू जब कुछु कमाय नइ सकय पइसा कउड़ी के आवक बंद हो जाथय, तब बहू मन के टेचरही गोठ सियानमन बर पहाड़ हो जाथय।कतको घर तो एक एक टिकली बर तरसथे। बड़हरमन तो वृद्धाश्रम भेज देथय। एकर इलाजबर जुन्ना दवई माने लमसेना लाय के परथा ला शुरू करे जाय।…
Read Moreनानकिन किस्सा : अमर
आसरम म गुरूजी, अपन चेला मनला बतावत रहय के, सागर मनथन होइस त बहुत अकन पदारथ निकलीस। बिख ला सिवजी अपन टोंटा म, राख लीस अऊ अमरित निकलीस तेला, देवता मन म बांट दीस, उही ला पीके, देवता मन अमर हे। एक झिन निचट भोकवा चेला रिहीस वो पूछीस – एको कनिक अमरित, धरती म घला चुहीस होही गुरूजी …..? गुरूजी किथे – निही… एको बूंद नी चुहे रिहीस जी …। चेला फेर पूछीस – तुंहर पोथी पतरा ला बने देखव, एक न एक बूंद चुहेच होही …? गुरूजी खिसियागे…
Read Moreमरनी भात
मरे मा खवाये संगी मरनी भात ये नो हे संगी सही बात जियत ले खवाये नहीं जिंयईया ला मरे के बाद खवाये बरा सोहारी अउ लाडू़ भात छट्ठी मा खवा के लाडू़ भात बताये अपन खुषी के बात फेर मरनी मा खवा के लाडू़ भात का बताना चाहत हस तिहि जान ? ये नो हे संगी सही बात मरे मा खवाये संगी मरनी भात मरनी घर के मन पडे़ हे अपन दुख मा ओ मन ला खुद के खाय के नई हे सुध हा का खाहू ओकर धर के भात…
Read Moreमुद्दा के ताबीज
केऊ बछर के तपसिया के पाछू सत्ता मिले रहय बपरा मनला। मुखिया सोंचत रहय के, कइसनों करके सत्ता म काबिज बने रहना हे। ओहा हरसमभव उपाय करे म लगे रहय। ओकर संगवारी हा देसी तरीका बतावत, एक झिन लोकतंत्र बाबा के नाव बताइस जेहा, ताबीज बांध के देवय। लोकतंत्र बाबा के ताबीज बड़ सरतियां रिहीस। जे मनखे ओकर ताबीज पहिर के, ओकर बताये नियम धरम के पालन करय तेला, ओकर वांछित फल खत्ता म मिलय। एक दिन लोकतंत्र बाबा तिर पहुंचगे मुखिया हा। बाबा तकलीफ पूछिस। मुखिया कहिथे – तकलीफ…
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