- साहित्यिक पुरखा के सुरता : प्यारेलाल गुप्त
- छंद चालीसा – छत्तीसगढी छंद के कोठी
- बालदिवस : मया करइया कका नेहरु
- गरीबा महाकाव्य (दसवां पांत : राहेर पांत)
- काबर बेटी मार दे जाथे
- सरगुजिहा कहनी- मितान
- न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में असिस्टेंट के 984 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित
- सहे नहीं मितान
- खने ला न कोड़े ला, धरे ल खबोसा
- कहिनी : चटकन
- कुण्डलियाँ
- रासेश्वरी
- श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल – ‘फुटहा दरपन’ अउ ‘मनखे मर गे’
- नाचा के पहिली महिला कलाकार : फिदाबाई मरकाम
- गाय निकलगे मोर घर ले
- देवारी तिहार : देवारी के दीया
- छेरछेरा अब आगे
- तयं काबर रिसाये रे बादर
- लघु कथा : पितर नेवता
- छत्तीसगढी शब्द में भ्रम के स्थिति….
- हरियर तरकारी
- दोहा गजल (पर्यावरण)
- ना बन बाचत हे ना भुइयां, जल के घलोक हे छिनइयां
- पताल के चटनी
- जै छत्तीसगढि़या किसान अउ खुश रहा
- होरी तिहार के ऐतिहासिक अउ धार्मिक मान्यता
- मोर छत्तीसगढ़ के माटी
- कका के बिहाव : सार-छंद
- नान्हे कहिनी : बदना
- पातर पान बंभुर के, केरा पान दलगीर
- सुरूज नवा उगइया हे : छत्तीसगढ़ी गज़ल संग्रह
- कपड़ा
- दिखय नही ओर-छोर, त का करन
- राजा के मुड़ी म सिंग
- छत्तीसगढ़ी काव्य चितेरे : बाबू प्यारेलाल गुप्त
- मंगत रविन्द्र के कहिनी ‘दुनो फारी घुनहा’
- कविता
- कस्तूरी – छत्तीसगढ़ के हरियर चाँउर
- नेता टेकनसिंह कहाय के सऊक
- हीरा मोती ठेलहा होगे
- परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास : सरसी छंद
- गॉंव कहॉं सोरियावत हे : गठरी सब छरियावत हें
- जब बेंदरा बिनास होही
- लोरिकायन – लाईट एण्ड साउंड (जुगुर-जागर रपट) : संजीव तिवारी
- पं.श्यामलाल चतुर्वेदी के कहिनी : रतनपुरहिन सियानिन
- हम जम्मो हरामजादा आन… (डॉ.मुकेश कुमार के हिन्दी कविता के अनुवाद)
- बाहिर तम्बू छोड़ के, आबे कब तैं राम
- बियंग : भइंस मन के संशो
- पितर के बरा
- गीत : चौरा म गोंदा रसिया, मोर बारी म पताल हे
- अंधरी के बेटा – विट्ठलराम साहू ‘निश्छल’
- सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार बर आवेदन 25 फरवरी तक
- कहिनी : साहस एकता अउ संकल्प
- मई दिवस म बनिहार मन ल समर्पित दोहागीत
- गंवइहा
- मेकराजाला म चार बरिस के गुरतुर गोठ : दू आखर
- चरगोड़िया
- अमरैया के छाँव म
- परोसी के भरोसा लइका उपजारना
- सुवा गीत : कही देबे संदेश
- मेला जाबोन
- जतन करव तरिया के
- छत्तीसगढ़ी गोठियावव अऊ सिखोवव – बेरा के गोठ
- लघुकथा : अमर
- हाय मोला मया लागे अउ रतिया तँय पूस के
- डाकघर म करावव रजिस्ट्रेशन, मोदी सरकार नौकरी देही
- लघुकथा – नौकरी के आस
- देवदास बंजारे स्मृति सम्मान समारोह
- बेटी ल बचाबो
- गांव-गंवई के बरनन- मिश्र के कविता में – सरला शर्मा
- छत्तीसगढ़ ‘वर्णमाला अउ नांव’ एक बहस
- राखी के आगे तिहार
- कबिता: पइधे गाय कछारे जाय
- आल्हा छंद : झाँसी के रानी
- मोर गाँव ले गँवई गँवागे
- महानदी पैरी अउ सोढुर तीनो के मिलन इस्थान म लगथे राजिम मेला
- एक बीता पेट बर
- छत्तीसगढ़ी के पीरा
- कैशलेस लेन-देन म छत्तीसगढ़ बनही अगुवा राज्य
- गरीबा महाकाव्य (तीसर पांत : कोदो पांत)
- छत्तीसगढ़ महिमा
- गज़ल : किस्सा सुनाँव कइसे ?
- राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री चन्द्रशेखर साहू ह मुख्यमंत्री संग करिन सौजन्य मुलाकात
- तीन कबिता
- संसो
- गति-मुक्ति : छत्तीसगढी कहिनी संग्रह
- अस्मिता के आत्मा आय संस्कृति
- फसल के पहली खेत मन के माटी के जांच जरूर करवाव
- गुदेलना – कहिनी
- कहिनी : राजा नवयुग के मंत्रीमंडल
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल सुरूज ला ढि़बरी देखाए देबे अउ मर जवान, मर किसान
- कालजयी छत्तीसगढ़ी गीत : ‘अंगना में भारत माता के सोन के बिहनिया ले, चिरईया बोले’ के गायक प्रीतम साहू
- शिव शंकर
- रायपुर : प्रादेशिक सेना के पैदल वाहिनी (153 इन्फैट्री बटालियन) के भर्ती रैली 08 ले 14 फरवरी तक
- पइधे गाय कछारे जाय
- मइया पांचो रंगा
- छत्तीसगढ़ी गज़ल
- हायकू
- सोरिहा बादर – गुड़ी के गोठ
