- वृत्तांत- (2) पंग पंगावत हे रथिया : भुवनदास कोशरिया
- सुरता गजानंद परसाद देवांगन
- स्वच्छ भारत के मुनादी
- मोर सोन चिरईया अउ मोहन के बाँसुरिया : गीत
- छत्तीसगढ़ी कहानी गीत विकलांग विमर्श म
- बोधन राम निषाद राज के गीत
- मुक्का उपास
- मोरो कोरा ल भर दे: मन्नीलाल कटकवार
- छंद बिरवा : चोवाराम वर्मा
- चिंतन के गीत
- शिक्षाकर्मी के पीरा
- दिसाहीनता – सुधा वर्मा
- छत्तीसगढ़ के माटी
- साल गिरहा मना लेतेन जोड़ी
- सत के रद्दा
- छत्तीसगढ़ के चिन्हारी गोदना
- नवगीत : गाँव हवे
- कबिता : चोरी ऊपर ले सीना जोरी
- होली हे भइ होली हे
- छत्तीसगढ़ी लघुकथा संग्रह – करगा
- मैं वीर जंगल के : आल्हा छंद
- गुनान गोठ : पाठक बन के जिए म मजा हे
- फुगड़ी गीत
- मइया पांचो रंगा
- कालजयी छत्तीसगढ़ी गीत : ‘अंगना में भारत माता के सोन के बिहनिया ले, चिरईया बोले’ के गायक प्रीतम साहू
- व्यंग्य : पहिचान
- कहिनी : डोकरा डोकरी : शिवशंकर शुक्ल
- नवा साल : कहानी
- बिधना के लिखना
- मोर गॉंव कहॉं सोरियावत हे : सबके मुड़ पिरवाथें
- छत्तीसगढ़ गौरव के रचियता पंडित शुकलाल पांडेय
- हेमलाल साहू के कविता
- पुरखा के थाथी
- छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग के तीसर प्रान्तीय सम्मलेन 2015
- व्यंग्य : माफिया मोहनी
- छत्तीसगढ़ के गारी -प्रतिकात्मक अभिव्यक्ति
- दुखिया बनगे सुखिया – राघवेन्द्र अग्रवाल
- छत्तीसगढ़ी कथा-कंथली : संकलन अउ लेखन – कुबेर
- उर्दू शेर के अनुवाद
- मोर महतारी (मेरी माँ)
- चढौत्तरी के रहस
- दियना के अंजोर (छत्तीसगढ़ी के पहली उपन्यास) शिवशंकर शुक्ल
- रतनपुर के महामाया माई मंदिर म लगिस स्वाइप मशीन : कैशलेश
- ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ के संग ‘स्मार्ट हाऊसिंग’ म घलोक सुजान हावय छत्तीसगढ़ पुलिस
- गँवई गाँव : शक्ति छंद
- किरीट सवैया : कपूत नहीं सपूत बनो
- छत्तीसगढ़ी गजल
- नाटक अऊ डॉ. खूबचंद बघेल
- अपन देस- शक्ति छंद
- पीरा ल कइसे बतावंव
- गांव ल झन भुलाबे अउ किसान
- तिलमति-चांउरमति : छत्तीसगढ़ी लोककथा-2
- नवा बच्छर के गोठ
- मर जबे गा संगवारी
- छत्तीसगढ़ म ठेकेदार ह केबल ल काट के ठप कर दीस जियो 4जी के सर्विस
- बुरा ना मानो होली है
- पंचायती राज के पंदरा अगस्त
- पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : नरसिंह दास
- जागव जी : अपन बुध लगावौ जी
- धूंका-ढुलबांदर: रवीन्द्र कंचन
- नमस्कार के चमत्कार
- पारसद ल प्रार्थना पत्र
- मंय बंदत हंव दिन रात ओ
- भाषांतर : एक महिला के चित्र (मूल रचना – खुशवंत सिंह. अनुवाद – कुबेर )
- नाचे नागिन रेडियो-रेडियो
- आगे पढ़ई के बेरा : मोर लइका ला कहाँ पढ़ांव
- छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर ह देश के पहिली कैशलेस बाजार
- आगे हरेली तिहार
- का पुरवाही में अईसने जहर घुरे हे
- ददरिया : लागे रहिथे दिवाना, तोर बर मोर मया लागे रहिथे
- पारंपरिक फाग गीत
- कहानी : अंधविसवास
- लमसेना प्रथा चालू करव
- कबिता : नवा हे बिहान
- छत्तीसगढ़ी के मानकीकरन अउ एकरूपता : मुकुन्द कौशल
- रूख तरी आवव
- सिंगारपुर के माँवली दाई
- दूध के करजा चुकाले रे
- पलायन (कहिनी)
- ‘छत्तीसगढ़ म सामाजिक समरसता कल अउ आज’ संगोष्ठी के आयोजन 19 फरवरी को
- लॉकडाउन म का करत हें असम के छत्तीसगढ़ वंशी
- चिरई चिरगुन बर पानी निकालव
- महेश पांडेय “मलंग” के छत्तीसगढ़ी कविता
- अक्षय तृतीया विशेष : पुतरी पुतरा के बिहाव
- जब ले बिहाव के लगन होगे
- तोर दू दिन के जिनगानी हे
- ‘तुंहर जाय ले गीयां’
- कहिनी : लछमी
- मुख्यमंत्री ह प्रसिद्ध लेखक अउ पर्यावरणविद अनुपम मिश्र के निधन म शोक प्रकट करिस
- लोकतंत्र के आत्मकथा
- रुद्री के रुद्रेश्वरधाम
- चोला माटी के हे राम
- छन्द के छ : दोहा छन्द
- अम्बिकापुर म सहायक प्रोग्रामर संविदा पद बर दावा-आपत्ति 7 मार्च तक
- कँपकँपाई डारे रे
- किसानी के पीरा
- कामकाजी छत्तीसगढ़ी मोर बिचार
- अपने घर म बिरान हिंदी महिना
- विचार के लहर : सियान मन के सीख
- आज के सतवंतिन: मोंगरा
