- छत्तीसगढ़ी भासा के महाकाव्यकार
- आ, इ, ई, छत्तीसगढ़ी हिन्दी शब्दकोश
- लिंग परिक्छन के परिनाम
- मोला नेता बना देते भोले बाबा
- रूख-राई ला काटे ले अड़बड़ पाप होथे
- गणपति विराजे
- राजा तरिया
- कवित्त
- पतरेंगी
- तिल-तिल बाढे़ के दिन जानव (14 जनवरी मकर संक्रान्ति)
- अनुवाद : आखिरी पत्ता (The Last Leaf)
- चिरई चिरगुन अतका तको नईये, वाह रे मनखे
- नरसिंह दास के सिव के बरात
- साहित्यिक पुरखा के सुरता : प्यारेलाल गुप्त
- ग़ज़ल
- हमर छत्तीसगढ़
- ऊँचई
- नाटक : रसपिरिया
- भक्ति-भाव के महापरब-सावन मास
- दमांद बाबू : कबिता
- छत्तीसगढी शब्द में भ्रम के स्थिति….
- छत्तीसगढ़ी के सरूप
- जीतेन्द्र वर्मा “खैरझिटिया” के दोहा : ज्ञान
- कहानी : कलम
- सुमिरव तोर जवानी ल
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल : कइसे मा दिन बढ़िया आही
- कहानी संग्रह : भोलापुर के कहानी
- वृत्तांत- (6) सबे जीव के सरेखा ..रखना हे : भुवनदास कोशरिया
- कहानी – देवारी के कुरीति
- गीत: सरद के रात
- कहिनी : ममता
- सोरिहा बादर – गुड़ी के गोठ
- अक्ती तिहार
- छत्तीसगढ़ के पर्यटन संबंधी फोटो खींचव अउ इनाम पावव
- सरसी छंद : जनकवि कोदूराम “दलित” जी
- छत्तीसगढ़ी भासा बर सकारात्मक संवाद जरूरी हे
- बांझ के पीरा-बांझ के सुख
- सरगुजिहा जाड़ा कर गीत
- बित्ता भर भुइयां
- जानबा
- चरगोड़िया
- बखत के घोड़ा
- दीया अउ जिनगी
- दूर के सोचथे महामानव
- कबिता : बसंत रितु आथे!
- बसंत ‘नाचीज’ के छत्तीसगढी गजल
- दाई अउ बबा के वेलेन्टाइन डे – कहिनी
- सावन
- होरी हे रिंगी चिंगी : रंग मया के डारव संगी
- सावन झूला
- कहानी – बड़की बहू
- मोर मातृभाषा छत्तीसगढी हे : पालेश्वर शर्मा
- सरद्धा अउ सराद्ध
- बादर के कन्डीसन
- कहिनी : चटकन
- चलव चली ससुरार
- ‘छत्तीसगढ़ के कलंक आय लोककला बिगड़इया कलाकार’
- राजिम महाकुंभ कल्प 2017
- घाम जनावत हे
- चुनई दंगा
- विश्व जल संरक्षण दिवस : सार छंद मा गीत – पानी जग जिनगानी
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – क्रिया
- कन्या भोज (लघुकथा )
- नवरात्र परब : मानस में दुर्गा
- जब तोर सुरता आथे
- गुरुजी बने परीक्षा देयबर परही
- मोर लइका पास होगे
- मोर भुईयां के भगवान
- नारी अउ सम्मान
- बरखा गीद
- विकास के प्राथमिकता म दुर्ग, भिलाई अउ चरौदा सर्वोपरि : डॉ. रमन सिंह
- बरछाबारी – 19
- मदरस कस मीठ मोर गांव के बोली
- गदहा मन के मांग
- कोनजनि मनखे आवस कि राक्षत रे काटजू
- बियंग : करजा के परकार
- महतारी बरोबर भउजी
- पढ़व, समझव अउ करव गियान के गोठ -राघवेन्द्र अग्रवाल
- भासा के लड़ाई कहां तक
- लघुकथा : कन्या भोज
- धर ले कुदारी गा किसान : सोनहा बिहान के गीत
- भूख के जात
- कहिनी : साहस एकता अउ संकल्प
- चंदैनी गोंदा, रामचंद्र देशमुख, लक्ष्मण मस्तुरिया अउ खुमान लाल साव एक दूसर के पर्याय
- नाचे नागिन रेडियो-रेडियो
- सरग सुख : कहिनी
- तीजा के अगोरा
- किसान के पीरा
- छत्तीसगढ़ के जुझारू पूत अउ महतारी भाखा के मयारुक साहित्यकार पं. सुंदर लाल शर्मा
- धूंका-ढुलबांदर: रवीन्द्र कंचन
- कहिनी फूल सुन्दरी राजकुमारी
- तोला देखत रहिथवं
- चोला माटी के हे राम
- नउकरी लीलत हमर तीजतिहार
- माटी के पीरा
- छत्तीसगढ़ी में मुहावरा के परयोग
- गरीबा महाकाव्य (दसवां पांत : राहेर पांत)
- लोक कथा : सुरहीन गैया
- फैसन के जमाना
- पारंपरिक लोक गीत : मोर मन के मजूर
