- धरती के बेटा
- मुर्रा के लाड़ू : नान्हे कहिनी
- कविता : बेरा हे गीत गाय के
- कविता – चिड़िया रानी
- छत्तीसगढ़ी कहानियों मे सांस्कृतिक चेतना
- मरहा राम के संघर्ष
- छत्तिसगढ़ के गंगा : हरि ठाकुर के गीत
- रासन कारड
- चुनाव ल देखत भाजपा ह साधत हे अप्रवासी प्रदेशवासी मन ल
- व्यंग्य : चुनाव के बेरा आवत हे
- तिंवरा भाजी
- कविता
- परबत के झांपी: रवीन्द्र कंचन
- रहचुली
- धान कटोरा रीता होगे
- पथरा के मोल
- छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य अउ देशबन्धु
- लहरागे छत्तीसगढ़ी के परचम
- चिल्हर के रोना
- कहानी संग्रह : भोलापुर के कहानी
- सक्ति अऊ भक्ति के संगम नवरात परब
- गुंडाधूर
- कुरसी नी पुरत हे
- खतरनाक गेम
- चाइना माडल होवत देवारी तिहार
- छत्तीसगढ़ी सन् 1917 म
- नान कुन कहानी : ठौर
- ननपन के सुरता : बाल भारती
- मेला मडई
- छत्तीसगढ़ी गज़ल
- नाचा के पहिली महिला कलाकार : फिदाबाई मरकाम
- आगे सावन रे
- जाड़ के महीना
- कहिनी फूल सुन्दरी राजकुमारी
- चलती के नाम गाड़ी, बिगड़ गे त…
- इहां… मना हावय
- विष्णुपद: छंद – मोखारी
- मई दिवस म बनिहार मन ल समर्पित दोहागीत
- हरेली के गीत
- सी.पी.तिवारी ‘सावन’ के छत्तीसगढ़ी गज़ल
- पुस्तक समीक्षा : अंतस म माता मिनी
- भोजली गीत
- शरीर के अंग अंग्रेजी, हिन्दी, छत्तीसगढ़ी
- हमला तो गुदगुदावत हे, पर के चुगली – चारी हर : छत्तीसगढ़ी गज़ल
- कहानी – बड़की बहू
- मया के दीया
- छत्तीसगढ़ राज्य अलंकरण – 2016
- ढेला अऊ पत्ता
- हाय रे मोर गुरतुर बोली
- प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – कहावतें
- पताल के चटनी
- बिकास के बदचाल म होली होवथे बदहाल
- उदेराम के सपना
- कुण्डलियाँ
- सुवा गीत : कही देबे संदेश
- संस्कृत विद्या मंडलम म मनाये गइस वाल्मीकि जयंती
- रूख-राई ला काटे ले अड़बड़ पाप होथे
- कविता : नोनी बर फुल
- हरियर तरकारी
- छत्तिसगढि़हा कबि कलाकार
- बदलत हे मोर राज
- महान आदिवासी जननेता महाराज परवीरचंदर भंजदेव जी
- मनखे गंवागे
- दू आखर
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- छत्तीसगढ़ी व्याकरण के 125 बछर
- तैंहर छोटे झन जानबे भइया एक ला : केयूर भूषण के गीत
- श्रीयुत् लाला जगदलपुरी जी के छत्तीसगढ़ी गजल – ‘दाँव गवाँ गे’ अउ ‘जहर नइये’
- छत्तीसगढ़ पुरातत्व और संस्कृति
- गरीब के देवारी
- राज्योत्सव मेला
- जाड़ हा जनावत हे
- हिन्दू नवा बच्छर के बधाई..
- साहित्यिक पुरखा के सुरता : प्यारेलाल गुप्त
- श्यामू विश्वकर्मा के कबिता : मन के आंसू मन म पोंछ ले
- सच्चा चेला
- धर्मेन्द्र निर्मल के पाँच गज़ल
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- लोक कथा : सुरहीन गैया
- बैसाखु के गांधी मिलगे
- गुरतुर गोठ परकासन के बारे म सूचना
- भगवान मोला गरीब बना दे
- मोर मन के पीरा
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- लक्ष्मण मस्तुरिया के कविता : आडियो
- उस्ताद अमजद अली खां, श्रीमती तीजन बाई, शेखर सेन अउ भारती बन्धु ल मानद डी.लिट् के उपाधी
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- नान्हें कहिनी गुरुजी के सीख – राघवेन्द्र अग्रवाल
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- हायकू
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- लाला फूलचंद श्रीवास्तव के कौशल प्रान्त ( छत्तीसगढ़ ) के बन्दना
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- छत्तीसगढ़ी व्यंग्य साहित्य को लतीफ घोंघी के अवदान का मूल्यांकन
- में नो हों महराज: नारायण लाल परमार
