- वृत्तांत- (1) इंहे सरग हे : भुवनदास कोशरिया
- गीत : सावन महीना
- गरियाबंद म डाटा एंट्री ऑपरेटर पद बर 526 आवेदन पात्र
- भगवान मोला गरीब बना दे
- मांघी पुन्नी के मेला
- लोकतंत्र के आत्मकथा
- एम्स, रायपुर में केशियर, असिस्टेंट इंजीनियर और अन्य वेकेंसी अंमित तिथि 27 मार्च
- चॉकलेट के इतिहास
- असमिया धुन मा छत्तीसगढ़िया राग, छत्तीसगढ़ मा होइस पहुना संवाद
- सावन मा बेलपत्र के महिमा
- मइया पांचो रंगा
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
- पुस्तक समीक्षा : गाँव के पीरा ‘‘गुड़ी अब सुन्ना होगे‘‘
- सनत के छत्तीसगढ़ी गज़ल
- श्रद्धांजलि – गीत संत: डॉ. विमल कुमार पाठक
- बाहिर तम्बू छोड़ के, आबे कब तैं राम
- अम्बिकापुर म सहायक प्रोग्रामर संविदा पद बर दावा-आपत्ति 7 मार्च तक
- करिया बादर छागे
- डर
- भगवान संग नता-रिस्ता- छत्तीसगढ़ के खास पहिचान आय
- उत्तर बस्तर कांकेर : दिव्यांग वर्षा ल मिलीस व्हीलचेयर
- छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह: धरती सबके महतारी -डॉ. बलदेव
- हाथी बुले गांव – गांव, जेखर हाथी तेखर नाव
- कबिता : मोर अंगना मा बसंत आगे ना
- गज़ल
- मुख्यमंत्री आठ फरवरी को जांजगीर-चाम्पा जिला के दौरा म रहिही
- कहानी : मंतर
- सबके अपन रंग
- बसंत ऋतु
- बाबा गुरु घासीदास के सब्बे मनखे ल एक करे के रहिस हे विचार मनखे मनखे एक समान
- कहानी संग्रह : भोलापुर के कहानी
- भंवरा तोर मन के नोहे: बद्री विशाल परमानंद
- कविता : मन के मोर अंगना म
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल सुरूज ला ढि़बरी देखाए देबे अउ मर जवान, मर किसान
- सरगुजिहा बोली कर गोठ
- मंदझाला
- छत्तीसगढ़ के चार झन हिम्मती लइका मन ल मिलही 2016-17 के राज्य वीरता पुरस्कार
- सिवजी ल पाय के परब महासिवरात्रि
- दैनिक देशबंधु के संदर्भ में छत्तीसगढ़ी की साहित्यिक पत्रकारिता का विश्लेष्णात्मक अध्ययन
- छत्तीसगढी साहित्य के सिरजन : लोकाक्षर 42
- कइसे उदुप ले डोकरा होगे
- पितर के बरा
- गाय निकलगे मोर घर ले
- बइगा के चक्कर – नान्हे कहिनी
- कहिनी : डोकरा डोकरी : शिवशंकर शुक्ल
- चिनहा
- मोर भाखा अङबङ गुरतुर हे
- मोर गाँव ले गँवई गँवागे
- व्यंग्य : गिनती करोड़ के
- मोर गॉंव कहॉं सोरियावत हे : मातर जागंय
- जिनगी कइसे चलही राम
- कोपभवन
- मया करे ले होही भाषा के विकास : अनुपम सिंह के जयप्रकाश मानस संग गोठ बात
- छत्तीसगढ़ी गज़ल
- जिनगी के रद्दा
- कहानी : सेमी कस बँटागे मनखे
- प्रकृति के नवा सिंगार अउ नवा बछर
- गॉंव कहॉं सोरियावत हे : चार आखर – बुधराम यादव
- परोसी के परेम
- मोला नेता बना देते भोले बाबा
- बारहमासी तिहार
- मुख्यमंत्री ह ‘रमन के गोठ’ म कैशलेस लेनदेन के बारे म समझाइन
- सुनिल शर्मा “नील” के दू कबिता : कइसे कटही जेठ के गरमी अउ हर घड़ी होत हे दामिनी,अरुणा हा शिकार
- ग़ज़ल छत्तीसगढ़ी
- फेर दुकाल आगे
- चिरई चिरगुन (फणीश्वरनाथ रेणु के कहानी आजाद परिन्दे)
- गुने के गोठ : मोर पेड़ मोर पहिचान
- मैं आदिवासी अंव
- सरग म गदर
- अइसन दिन आये हे
- सीला बरहिन नान्हें कहिनी – सत्यभामा आड़िल
- लड़की खोजत भंदई टूट जाय
- कहॉं जाबो साहर
- बरखा गीत
- बड़का कोन
- सुरता : प्रेमचंद अउ गांव
- सुमिरव तोर जवानी ल
- पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : पद्मश्री मुकुटधर पाण्डेय
- गहना गुरिया : चौपाई छंद
- कहिनी – जुड़वा बेटी
- आमा के चटनी
- वंदे मातरम
- मिट्ठू मदरसा : रविन्द्रनाथ टैगोर के कहिनी के छत्तीसगढ़ी अनुवाद
- कुकुर मड़ई माने डॉग शो अउ डॉग ब्यूटी कान्टेस्ट – गुड़ी के गोठ
- सरगुजिहा गीत – गोई रे
- चिंतन के गीत
- गुरतुर भाखा : छत्तीसगढ़ी कविता पाठ
- अईसने चुनई आथे का
- पुरखा मन के दूत होथे कउवा
- छत्तीसगढ़ी उपन्यास : जुराव
- अहो मन भजो गणपति महराज
- नान्हे कहिनी- चिन्हारी
- हिम्मत हे त आघु आ
- मत्तगयंद सवैया : किसन के मथुरा जाना
- हे राम : नारायण लाल परमार के नवगीत
- मोर हतिया झन करवाबे दाई
- असाढ़ ले आसरा हे….
- मुख्यमंत्री हर नक्सली मन ले करिस बंदूक छोड़े अऊ शांतिपूर्ण विकास के मुख्यधारा ले जुड़े के गिलौली
- गढ़बो नवा छत्तीसगढ़
- बियंग : करजा के परकार
