- कका के बिहाव : सार-छंद
- बेटी मन ल बचाए बर
- अहिमन कैना : छत्तीसगढी लोक गाथा
- कबिता : मोर अंगना मा बसंत आगे ना
- नान्हे कहिनी: लइकाहा बबा
- उठ जा बाबु आंखी खोल
- जमुना के तीर तीर हो
- घाम घरी आगे – कबिता
- लइका अउ सियान खेलव कुरिया मा
- संबंध मिठास के नांव ताय मड़ई ह
- मुख्यमंत्री ह करिस सन् 2017 के सरकारी कैलेण्डर अउ डायरी के विमोचन
- किताब कोठी : हीरा सोनाखान के
- कोनजनि मनखे आवस कि राक्षत रे काटजू
- बेरोजगारी
- सरगुजा कर देखे जोग झरना
- मतदान : चौपई छंद (जयकारी छंद)
- महेन्द्र देवांगन माटी के कविता : बसंत बहार
- नशा : कविता
- साहित्यिक पुरखा के सुरता – कपिलनाथ मिश्र
- भुंइया के भगवान
- फिल्मी गोठ : झन मारव गुलेल
- छत्तीसगढ़ महिमा
- बसंत राघव के छत्तीसगढ़ी गज़ल
- ग़ज़ल : गुलेल
- ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ के संग ‘स्मार्ट हाऊसिंग’ म घलोक सुजान हावय छत्तीसगढ़ पुलिस
- गज़ल : छत्तीसगढ़ी गज़ल संग्रह “बूड़ मरय नहकौनी दय” ले 2
- कमरछठ कहानी (3) – मालगुजार के पुण्य
- छत्तीसगढ़ की महिला रचनाकारों की साहित्य का अनुशीलन
- खोखो मोखो डलिया, पाके बुंदेलिया : छत्तीसगढ़ी बाल गीत
- गाँव कहाँ सोरियावत हें (छत्तीसगढ़ी कविता संग्रह के कुछ अंश )
- रेमटा टुरा – २ चिपरिन के मही
- अभार अभिनंदन अटल जी के (25 दिसंबर अटल बिहारी वाजपेयी के जनमदिन)
- तिल सकरायत
- अगहन महीना के कहानी
- मोर छत्तीसगढ़ के किसान
- 8 बछर के पाछू सुरता आईस टाटपट्टी घोटाला
- पं. खेमेस्वर पुरी गोस्वामी के दस ठन कविता
- दोसती
- दादूलाल जोशी ‘फरहद’ के छै ठन कविता
- धरती म समावय निस्तारी के पानी – गुड़ी के गोठ
- छत्तीसगढी उपन्यास – माटी के बरतन
- झांझ – झोला
- परंपरा के रक्छा करत हावय ‘मड़ई’ : डॉ.कालीचरण यादव संग गोठ-बात
- आरटीओ चेकिंग : समसामयिक हास्य संस्मरण
- मोर गांव म कब आबे लोकतंत्र
- ईमानदार चोर
- बुढ़वा कोकड़ा : हरप्रसाद ‘निडर’
- परम पूज्य बाबा गुरु घासीदास : सरसी छंद
- सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार बर आवेदन 25 फरवरी तक
- नान्हे कहिनी: धन होगे माटी(अनुवाद)
- वृत्तांत (10) : जिनगी ह पानी के, फोटका ये फोटका
- मोला करजा नई सुहावय
- कामवाली चमेली के पीरा
- पावन धरती राजिम ला जोहार
- छत्तीसगढ़ के गारी -प्रतिकात्मक अभिव्यक्ति
- सरगुजिहा गीत- दिन कर फेर
- मनोज कुमार श्रीवास्तव के सरलग 41 कविता
- नियाव के जीत
- धरम बर तुकबंदी
- नानकिन किस्सा : प्याऊ
- सरकारी इसकूल
- मैं आदिवासी अंव
- यमराज ह पिकनिक मनाय जब धरती म आइस
- छत्तीसगढ़ी नाटक – मतदान बर सब्बो झन होवव जागरूक
- कबिता: पइधे गाय कछारे जाय
- छत्तीसगढ़ी साहित्य सम्मेलन 2009
- बसंत ऋतु
- कविता: फूट
- झन बिसावव सम्मान
- योग रखय निरोग बरसात मा
- पतंजलि के योग दर्शन, बाल्मिकी मूल रामायण, ईशावास्योपनिषद : अनुवाद
- गरीबा महाकाव्य (पंचवईया पांत : बंगाला पांत)
- नान्हे कहिनी : जिनगी के मजा
- समारू कका आई पी एल मैच के दिवाना
- बाल कहिनी : अइसे धरिन चोर गोहड़ी
- चरभंठिया को गोठ
- छत्तीसगढी गोठ बात : जंवरा-भंवरा
- हमर देश के किसान ….
- ‘छत्तीसगढ़ के कलंक आय लोककला बिगड़इया कलाकार’
- छन्द के छ : एम.ए.छत्तीसगढी के पाठ्यक्रम मा जोडे जाना चाही
- डॉक्टर अउ कवि
- माटी माथा के चंदन
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
- सुकवा कहे चंदा ले
- चरगोड़िया : रघुबीर अग्रवाल ‘पथिक’
- कहानी : डाक्टर बिलवा महराज के बेटा पीच दारू
- जुन्ना सोच लहुटगे हमर रंग बहुरगे
- छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के आयोजन
- गहना गुरिया : चौपाई छंद
- सासाबेगी
- बसंत ‘नाचीज’ के छत्तीसगढी गजल
- मोर मन के बात
- भगत के बस म भगवान – लोककथा
- हमर छत्तीसगढ़ योजना : रंग लावत हे महिला मन के संघर्ष
- विश्व जल संरक्षण दिवस : सार छंद मा गीत – पानी जग जिनगानी
- मनखे-मनखे एक समान
- मड़ई मेला
- रितु बरनन
- छत्तीसगढ़ी नाचा के जनक : दाउ दुलारसिंह मंदराजी
- छत्तीसगढ़ी भाषा मं लिनक्स अउ विंडोज प्रोग्राम
