- मोर गांव म कब आबे लोकतंत्र
- रहचुली
- सुकवा कहे चंदा ले
- तोर मया
- लोक कथा : घंमडी मंत्री
- मोर सुआरी परान पियारी
- कलेवा
- गँवई गाँव : शक्ति छंद
- लइका बर खसरा अउ रुबैला टीका
- टेकहाराजा : छत्तीसगढ़ी लोक नाट्य के नवा अंजोर
- उत्ती के बेरा
- पथरा के मोल
- छत्तीसगढ़ी उपन्यास : जुराव
- राजिम मेला
- नान्हे कहिनी : सिरिफ एक पेड़
- बांझ के पीरा-बांझ के सुख
- नारी अउ सम्मान
- नौ बछर के छत्तीसगढ़
- फसल के पहली खेत मन के माटी के जांच जरूर करवाव
- सुकवि बुधराम यादव के सरस कविता संग्रह ”गॉंव कहॉं सोरियावत हें” गुरतुर गोठ म लउहे
- छत्तीसगढ़ी काव्य संग्रह: धरती सबके महतारी -डॉ. बलदेव
- अनुवाद : बारह आने
- कैसे करन तोर बापू बडा़ई : दाऊ निरंजनलाल गुप्ता के गीत
- महतारी दिवस विशेष : महतारी महिमा
- धान – पान
- दिनेश चौहान के छत्तीसगढ़ी आलेख- सेना, युद्ध अउ सान्ति
- छत्तीसगढ़ की महिला रचनाकारों की साहित्य का अनुशीलन
- गांव-गंवई के बरनन- मिश्र के कविता में – सरला शर्मा
- मिट्ठू मदरसा : रविन्द्रनाथ टैगोर के कहिनी के छत्तीसगढ़ी अनुवाद
- सेना में वॉशरमैन पद समेत अन्य रिक्ति, योग्यता 10वीं/12वीं पास
- मोर मन के बात
- भुंइया के भगवान
- छत्तीसगढ़ी बोले बर लाज काबर
- प्रकृति के पयलगी पखार लन
- कहॉं जाबो साहर
- माटी हा महमहागे रे
- किसना के लीला : फणीश्वर नाथ रेणु के कहानी नित्य लीला के एकांकी रूपांतरण
- बसंत उपर एक छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल
- ऐसो के देवारी म
- कहिनी : लछमी
- जनकृति अंतरराष्ट्रीय पत्रिका लोकभाषा विशेषांक : छत्तीसगढ़ी
- नवा बइला के नवा सिंग
- व्यंग्य कविता : सफई अभियान
- नवा रइपुर मोर रइपुर
- घाम घरी आगे – कबिता
- छत्तीसगढी गोठ बात : जंवरा-भंवरा
- सुरता तोर आथे
- गाय निकलगे मोर घर ले
- जनम भूमि : कहिनी
- सोनाखान के सोन-शहीद बीर नारायण सिंह
- एक एक पेड़ लगाओ
- चौपाई छंद – सर्दी आई
- फूलो
- जनतंत्र ह हो गय जइसे साझी के बइला
- शेषनाथ शर्मा ‘शील’ के बरवै छंद
- कलाकार के सबले बड़े दुसमन गरब हर होथे
- मन के दीया ल बार
- लोक परब छेरछेरा : समाजिक समरसता के तिहार
- नवा ट्रांसफार्मर लगे ले जगमगाइस रमेशपुर : गांव वाले मन म छाईस खुशी के लहर
- हरमुनिया – मंगत रविन्द्र के कहिनी
- झगरा फेंकी डबरा
- मन डोले रे मांग फगुनवा …. बादर के दिन म फागुन लावत हें भाई लक्ष्मण मस्तुरिहा
- कलजुगहा बेटा : नान्हे कहिनी
- कविता-समाज ल आघू बढ़ाबोन
- देवारी के दीया
- रायपुर : प्रादेशिक सेना के पैदल वाहिनी (153 इन्फैट्री बटालियन) के भर्ती रैली 08 ले 14 फरवरी तक
- पानी हे अनमोल
- नइए भरोसा संगवारी-रागी
- मधुमास
- धान कटोरा रीता होगे
- अवइया मुख्यमनतरी कइसन हो ?
- पांच बछरिया गनपति
- त्रिवेणी संगम म शाही स्नान के साथ राजिम महाकुंभ कल्प के होय समापन
- हमला तो गुदगुदावत हे, पर के चुगली – चारी हर : छत्तीसगढ़ी गज़ल
- ग़ज़ल
- योग के दोहा
- बुढ़वा लइका पांव पखारत हे तोर
- लघु कथा – सोज अंगुरी के घींव
- नियाव के जीत
- मानक बिना मान नही
- अभिनय के भूख कभी नइ मिटय : हेमलाल
- कबिता : बसंत रितु आथे!
- गज़ल : छत्तीसगढ़ी गज़ल संग्रह “बूड़ मरय नहकौनी दय” ले 2
- नवा बछर के शुरुआत : कहानी
- सोलह सिनगार
- तेजनाथ के रचना
- आम आदमी
- खेत खार बखरी मं गहिरागे साँझ : पवन दीवान के गीत
- कमरछठ कहानी (2) – सातो बहिनी के दिन
- छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल : कइसे मा दिन बढ़िया आही
- सोनाखान के सोन: शहीद बीर नारायण सिंह
- रोवत हे किसान
- नान्हे कहिनी : डेहरी के दिया
- गांधीजी के बानी दैनिन्दिन सोंच बिचार
- सरसों ह फुल के महकत हे
- पुस्तक समीक्षा : माटी की महक और भाषा की मिठास से संयुक्त काब्य सग्रंह- ‘जय हो छत्तीसगढ़’
- जवारा अउ भोजली के महत्तम
- बुढ़वा कोकड़ा : हरप्रसाद ‘निडर’
- नवा बछर के मुबारक हवै
- जय सिरजनहार, जय हो बनिहार
